सरायकेला | झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में 0रविवार को सरायकेला जिला कारागार में जेल अदालत-सह-विधिक जागरूकता शिविर और चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता तौसिफ मेराज, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां ने की। उन्होंने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बंदियों को उनके विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है।

उन्होंने चिकित्सा जांच शिविर के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच आवश्यक है और जीवन में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। साथ ही मोटर वाहन दुर्घटनाओं और मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित मुआवजा प्रक्रिया के बारे में भी बंदियों को विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को गुड समैरिटन कानून के तहत कानूनी संरक्षण दिया गया है।
कार्यक्रम में अनामिका किस्कू, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-सह-न्यायिक दंडाधिकारी; देव प्रताप तिवारी, सहायक लोक अभियोजक; डॉ. धरम महेश्वर महाली, डॉ. शुभम तथा सोनू कुमार, जेलर जिला कारागार सरायकेला उपस्थित थे।
इस दौरान चिकित्सा पदाधिकारियों ने बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। कार्यक्रम के बाद न्यायिक पदाधिकारियों ने जिला कारागार के महिला वार्ड का भी दौरा किया और महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। साथ ही उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता की सुविधा के बारे में अवगत कराया।

