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कोल्हान विश्वविद्यालय में छठा दीक्षांत समारोह आज — तैयारियां पूरी, राज्यपाल होंगे मुख्य अतिथि

कोल्हान विश्वविद्यालय में छठा दीक्षांत समारोह आज — तैयारियां पूरी, राज्यपाल होंगे मुख्य अतिथि

चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में , 26 नवंबर 2025 (बुधवार) को छठा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और समारोह अब पूरी तरह अंतिम रूप ले चुका है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर महामहिम राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोधरत विद्यार्थियों को उपाधि और पदक प्रदान किए जाएंगे।

विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम को गरिमापूर्ण और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था, मंच संचालन और अतिथि सत्कार से जुड़े सभी इंतजाम सुनिश्चित कर दिए गए हैं।

सारजोम युवा फाउंडेशन की बैठक — नशा मुक्त समाज के लिए लिया संकल्प

सारजोम युवा फाउंडेशन की बैठक — नशा मुक्त समाज के लिए लिया संकल्प

जमशेदपुर : सोमवार को सारजोम युवा फाउंडेशन की ओर से दुःखू टोला, करनडीह में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता फाउंडेशन के अध्यक्ष सागर हेंब्रम ने की। बैठक का मुख्य विषय था — नशा मुक्त समाज का निर्माण।

बैठक में संगठन की महिलाओं ने नशे के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है, जिसके कारण परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। खासकर युवाओं में नशे की लत बढ़ने से वे दिशा हीन हो रहे हैं और आये दिन अप्रिय घटनाएं सामने आ रही हैं।

अध्यक्ष सागर हेंब्रम ने कहा कि नशा मुक्त समाज बनाने के लिए जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। नशा एक अभिशाप है, जो सिर्फ व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संकल्प लेने और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।

बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए संकल्प लिया। बैठक को सफल बनाने में सरस्वती सुंडी, नीलम बिरुआ, फूलो सवैया और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सारंडा के रेड़ा टोला में विकास की पोल—78 साल बाद भी पानी के लिए संघर्ष, महिलाओं ने सरकार से पूछा तीखा सवाल

सारंडा के रेड़ा टोला में विकास की पोल—78 साल बाद भी पानी के लिए संघर्ष, महिलाओं ने सरकार से पूछा तीखा सवाल

मनोहरपुर : जहां झारखंड अपने 25 वर्षों के सफर में तेज रफ्तार विकास का दावा करता है, वहीं सारंडा के समथा गांव के रेड़ा टोला की स्थिति इस दावे को सीधा चुनौती देती है। आज़ादी के 78 साल बाद भी यहां की तस्वीर गांव नहीं, बल्कि उपेक्षा और संघर्ष की कहानी कहती है।

पेयजल संकट — सबसे बड़ी चिंता
रेड़ा टोला में पेयजल की समस्या इतनी गंभीर है कि महिलाओं का दिन पानी की तलाश से शुरू होकर पानी पर ही समाप्त हो जाता है। बरसात में नाला उफान पर होता है, और कमर तक पानी पार करके पीने का पानी लाना पड़ता है। गर्मी में नाला सूख जाता है, तब महिलाएं नमी वाली जगहों पर चुवाँ (छोटे गड्ढे) बनाकर पानी छानकर पीने को मजबूर होती हैं।

एक महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा —
“घर में खाने से ज्यादा मुश्किल पानी लाना है। सरकार सुनती है, लेकिन काम नहीं करती।”

नेताओं के वादे बनाम ज़मीन की हकीकत
चुनाव के समय नेताओं के भाषणों में विकास की बरसात होती है, लेकिन रेड़ा टोला की महिलाओं के लिए पानी लाना आज भी संघर्ष का पर्याय है। हर चुनाव के बाद यहां सिर्फ वादे लौटते हैं, नतीजे नहीं।

अधूरी योजनाओं की लंबी सूची

हर घर जल योजना अभी तक पूरी नहीं

स्वास्थ्य केंद्र दूर और अनुपलब्ध

सड़कें उबड़-खाबड़ और खतरनाक

सरकारी सप्लाई व्यवस्था ठप


गांव की महिलाओं का सरकार से सीधा सवाल

क्या हमें साफ पानी के लिए और सौ साल इंतज़ार करना पड़ेगा?

क्या विकास सिर्फ शहरों तक सीमित है?

क्या हम सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं?

25 साल के झारखंड का यही विकास मॉडल है?


झारखंड की पहचान भले ही जंगल, खनिज और समृद्ध संस्कृति से हो, लेकिन रेड़ा टोला जैसे गांव आज भी हाशिये पर हैं — भूले हुए नक्शों और अधूरे वादों के बीच फंसे हुए।

सरकार से जवाब मांगता है रेड़ा टोला
क्या विकास का अधिकार सबका है, या सिर्फ चुनिंदा इलाकों का?

झारखंड में एसआईआर को लेकर सियासी गर्मी तेज — चंपाई सोरेन ने घुसपैठ पर उठाए गंभीर सवाल

झारखंड में एसआईआर को लेकर सियासी गर्मी तेज — चंपाई सोरेन ने घुसपैठ पर उठाए गंभीर सवाल

सरायकेला : झारखंड में एसआईआर (Systematic Investigation of Registration) को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के कई इलाकों में 80% से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए जा रहे हैं। ऐसे में सीमावर्ती जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

चंपाई सोरेन ने लिखा कि भारत का संविधान केवल भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार देता है। चुनाव आयोग की इस पहल के बाद घुसपैठियों के सहारे सत्ता हासिल करना अब बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने पर पश्चिम बंगाल से करोड़ों और झारखंड से लाखों घुसपैठियों के नाम voter list से हटाए जा सकते हैं।

राज्य में बढ़ी राजनीतिक हलचल

झारखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कांग्रेस और झामुमो इस प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं राजद के नेता भी प्रतिदिन एसआईआर के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने झारखंड में प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू होगी, यह राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद और चुनावी बहस का विषय बन सकता है। फिलहाल, इस मुद्दे की जमीन तैयार होती हुई दिखाई दे रही है।

45 लाख बच्चों की परीक्षा 8 महीने से ठप, अबुआ सरकार जश्नों में मशगूल, बच्चों का भविष्य रसातल में: धी. रामहरि पेरियार

45 लाख बच्चों की परीक्षा 8 महीने से ठप, अबुआ सरकार जश्नों में मशगूल, बच्चों का भविष्य रसातल में: धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : झारखंड में 45 लाख बच्चों की परीक्षाएँ पिछले 8 महीनों से ठप पड़ी हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान नाच-गान, मेला, मंच और सरकारी कार्यक्रमों पर है। शिक्षा जैसी गंभीर व्यवस्था को बुरी तरह ध्वस्त कर देने वाली यह स्थिति अभिभावकों और छात्रों को गहरी चिंता में डाल रही है।
    एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक अखबार की कटिंग ही अबुआ सरकार की सच्चाई बयान करने के लिए काफी है। कार्यक्रमों की धूम है, लेकिन बच्चों का भविष्य अंधेरे में पड़ा है।
   उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही बची है, बच्चों की परीक्षा रोक देना।
पेरियार ने सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना दिया गया है। सरकार जश्न मना रही है, जबकि 45 लाख बच्चों का भविष्य राख किया जा रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात है।

प्रशासन मौन, जवाबदही गायब

पेरियार ने कहा कि प्रशासन सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त है, लेकिन बच्चों की परीक्षा की तिथि पर न कोई जवाब है, न मंशा। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह राज्य के भविष्य को कुचलने की सरकारी नीति है।

अभिभावकों में हताशा-स्कूलों में भय का माहौल

लगातार 8 महीनों से परीक्षा रुकी होने से बच्चों की पढ़ाई की लय टूट चुकी है। अभिभावक चिंता में हैं, स्कूलों का पूरा अकादमिक कैलेंडर चरमरा गया है और पढ़ाई पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित

शिक्षा विभाग अब तक किसी स्पष्ट समय-सारिणी की घोषणा नहीं कर पाया है। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पेरियार ने कहा, जो सरकार भविष्य रोक दे, वह विकास का दावा किस मुंह से कर सकती है?

कुर्सी में 43वीं फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल समापन — विजेता टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

कुर्सी में 43वीं फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल समापन — विजेता टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

चाईबासा : सरायकेला जिला के कुर्सी (रंगो) में सरना क्लब द्वारा आयोजित 43वीं तीन दिवसीय फुटबॉल प्रतियोगिता 2025 का समापन समारोह मंगलवार को उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। समापन कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चंपई सोरेन के प्रतिनिधि के रूप में रानी बांदिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

मुख्य अतिथि ने विजेता दिलजले एफसी (रोलाडीह) और उपविजेता ब्लू रेबेल (खैरपाल) की टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम में कुर्सी पंचायत की मुखिया नीरेस देवगम, पंचायत समिति सदस्य सावन तियु, राकेश गोप, मरंग बाबू और मुख्य संरक्षक सुरेंद्र कुजूर मौजूद रहे।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए रानी बांदिया ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता की राह दिखाता है। उन्होंने युवाओं से खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए ग्रामीणों को स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली अपनाने तथा नशे से दूर रहने की सलाह दी।

जयराज नगर का नामकरण और ट्रांसफार्मर का उद्घाटन — सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

जयराज नगर का नामकरण और ट्रांसफार्मर का उद्घाटन — सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

गम्हरिया : सरायकेला-खरसावां जिला के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत रापचा पंचायत के मौजा पिंड्राबेड़ा में रविवार को जयराज नगर के नामकरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद जोबा माझी शामिल हुईं। उन्होंने नामकरण बोर्ड का फीता काटकर उद्घाटन किया और जयराज नगर में लगाए गए नए ट्रांसफार्मर का भी औपचारिक शुभारंभ किया। उल्लेखनीय है कि सांसद के प्रयासों से क्षेत्र में नया ट्रांसफार्मर और बिजली के पोल स्थापित किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय निवासियों ने सांसद के समक्ष पक्की सड़क निर्माण, कंपनियों से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण, तथा अन्य जनसमस्याओं के समाधान की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

सांसद जोबा माझी ने अपने संबोधन में कहा कि जयराज नगर का नामकरण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए अंचल कार्यालय के माध्यम से सरकारी मान्यता प्राप्त करने की दिशा में पहल होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि बस्ती के विभिन्न हिस्सों में पक्की सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा और अन्य समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

इस दौरान जयराज नगर के लोगों ने सांसद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में रापचा के पूर्व मुखिया जवाहरलाल महाली, झामुमो के जिला सचिव वैद्यनाथ टुडू, पश्चिम सिंहभूम झामुमो सचिव राहुल आदित्य, समाजसेवी कालीपद सोरेन, जयराज नगर विकास समिति के रामजी सिंहदेव, सुग्रीव मुखी, विजय कुमार, आसीत आचार्य, गोपाल सिंह, अजय लाल, रत्नेश दुबे, विशेश्वर महाली, दिनेश महतो, दीपांकर पटनायक, मुनी पांडेय, कार्तिक महतो, संजीव प्रधान, राजेश महाली, जितेंद्र प्रमाणिक सहित कई लोग उपस्थित रहे।

पालोबेड़ा में दर्दनाक हादसा — घर पर पलटा हाइवा, पिता-बेटी की मौत, कंपनी ने दिया 25 लाख मुआवजे का आश्वासन

पालोबेड़ा में दर्दनाक हादसा — घर पर पलटा हाइवा, पिता-बेटी की मौत, कंपनी ने दिया 25 लाख मुआवजे का आश्वासन

ग़म्हरिया : कांड्रा थाना अंतर्गत हुदु पंचायत के पालोबेड़ा गांव में रविवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। गिट्टी से लदा हाइवा वाहन अनियंत्रित होकर बीरबल मुर्मू के घर पर पलट गया। हादसे के समय परिवार घर के भीतर सो रहा था। गिट्टी और दीवार गिरने से बीरबल मुर्मू (37) और उनकी डेढ़ साल की बेटी अनुश्री मुर्मू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

सूत्रों के अनुसार, हुदु पंचायत में लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान यह हादसा हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया, लेकिन शीघ्र ही पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासन और कंपनी के मैनेजर के साथ सकारात्मक वार्ता हुई।

वार्ता हुई सफल — कंपनी देगी 25 लाख रुपये व नया घर
हुदु पंचायत की मुखिया श्रीमती सुगी मुर्मू और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय सदस्य श्री कृष्णा बास्के के नेतृत्व में बैठक हुई। कंपनी ने सहानुभूति जताते हुए पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये और एक नया घर बनाने की लिखित सहमति दी है। साथ ही, श्राद्ध कर्म के लिए तुरंत 50,000 रुपये दिए गए हैं और अगले दिन 50,000 रुपये और दिए जाएंगे। शेष राशि 26 नवंबर को RTGS के माध्यम से बीरबल की पत्नी शेफाली मुर्मू के खाते में भेजी जाएगी।

बैठक में मौजूद रहे अधिकारी व ग्रामीण
बैठक में मुख्य रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री साधु चरण देवगम, थाना प्रभारी श्री विनोद कुमार मुर्मू, प्रखंड समन्वयक श्री सावन सोय, कनिष्ठ अभियंता श्री नामी सिंह मुंडा, पंचायत समिति सदस्य मोनो टुडू, ग्राम प्रधान रागदू किस्कू, लक्ष्मण सरदार, फागु मुर्मू, विजय महतो, राजेश मुर्मू, भगतू मुर्मू, रूपक मुर्मू, मनसा मुर्मू, मंगल मुंडा, बालेश्वर मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

जैतगढ़ में जंगली हाथियों का कहर — 45 हाथियों के झुंड से फसलें तबाह, ग्रामीणों में गहरा डर

जैतगढ़ में जंगली हाथियों का कहर — 45 हाथियों के झुंड से फसलें तबाह, ग्रामीणों में गहरा डर

जगन्नाथपुर : जैतगढ़ एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगभग 45 जंगली हाथियों का विशाल झुंड पिछले एक सप्ताह से आतंक मचा रहा है। चार पंचायतों — पत्ताजैंत, सियालजोड़ा, कसेरा और तोडंगहटू के दो से अधिक दर्जन गांवों की धान और सब्जी की तैयार फसलें बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है, वहीं वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।

दो झुंडों में विभाजित, फिर हुए एकजुट

मिली जानकारी के अनुसार हाथियों का यह झुंड दो हिस्सों में बंटा था  :-

23 हाथी दीदीबरु जंगल में,

22 हाथी दावबेड़ा बिट में डेरा डाले हुए थे।


शुक्रवार को दोनों झुंड कोकुआ नाला के पास आकर एकजुट हो गए, जिसके बाद शनिवार दोपहर इन्हें जैतगढ़–जगन्नाथपुर मुख्य मार्ग पर रोगाढ़ा के पास विचरण करते देखा गया। बेलपोसी गांव के निकट मुख्य सड़क से एक किलोमीटर दूर भी बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथियों को देखने पहुंचे।

खेतों में हो रहा भारी नुकसान

किसान मित्र श्रीनिवास तिरिया ने बताया कि सूर्यास्त होते ही हाथी खेतों की ओर रुख कर लेते हैं। धान की तैयार फसल के साथ-साथ सब्जी बागानों का भी भारी नुकसान हो रहा है। अब तक चार पंचायतों के दो दर्जन से अधिक किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं।

वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है, जबकि हाथी अब आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगे हैं। सुरक्षा के अभाव में ग्रामीण टीना पीटकर और पटाखे छोड़कर खुद ही हाथियों को भगाने का जोखिम उठा रहे हैं। परिणामस्वरूप शाम होते ही गांवों की सड़कें सुनसान हो जाती हैं और मुख्य सड़क पर भी लोगों का आना-जाना कम हो गया है।

शुक्रवार शाम को हाथी जैतगढ़–जगन्नाथपुर मुख्य सड़क पर भी घूमते देखे गए, जिसके बाद ग्रामीणों में डर और बढ़ गया।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि हाथियों के इस बढ़ते खतरे से फसलों और मानव जीवन को बचाया जा सके। स्थिति को देखते हुए जल्द ही राहत व सुरक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सरायकेला के कमलपुर गांव के बारीडीह टोला में ‘प्रभात खबर आपके द्वार’ कार्यक्रम — ग्रामीणों ने सुनाई समस्याओं की कहानी, कहा: आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

सरायकेला के कमलपुर गांव के बारीडीह टोला में ‘प्रभात खबर आपके द्वार’ कार्यक्रम — ग्रामीणों ने सुनाई समस्याओं की कहानी, कहा: आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

सरायकेला : सरायकेला प्रखंड के कमलपुर गांव स्थित बारीडीह टोला में रविवार को ‘प्रभात खबर आपके द्वार’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सड़क, पेयजल, वृद्धा पेंशन सहित कई मूलभूत सुविधाओं की कमी को प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि आज भी टोला के लोग सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।



जर्जर सड़क बनी बड़ी चुनौती

ग्रामीणों ने बताया कि बारीडीह टोला को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग घोड़ालांग गांव होकर जाता है, लेकिन घोड़ालांग तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे और बड़े पत्थर उभर आए हैं, जिससे आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को होती है।



आंगनबाड़ी और स्कूल जाने से कतराने लगे बच्चे

सड़क खराब होने का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र एक किलोमीटर दूर घोड़ालांग में है, जबकि प्राथमिक विद्यालय दो किलोमीटर दूर डांगरडीहा गांव में स्थित है। बच्चों को रोजाना खराब रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि छोटे बच्चे आंगनबाड़ी जाने से कतराने लगे हैं और स्कूली छात्रों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।




गर्मी में पेयजल संकट, पेंशन भी नहीं मिलती समय पर

ग्रामीणों ने बताया कि टोला में पेयजल की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। गर्मी के दिनों में पानी का संकट और बढ़ जाता है। वहीं बुजुर्गों ने शिकायत की कि वृद्धा पेंशन की राशि समय पर नहीं मिलती। ब्लॉक कार्यालय और बैंक के बीच चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे परेशानियों में इजाफा होता है।