गोइलकेरा | गोइलकेरा बाजार क्षेत्र में पिछले करीब दो महीनों से पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे लगभग 250 घरों के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण जलापूर्ति योजना बदहाल स्थिति में पहुंच गई है और स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
गोइलकेरा बाजार क्षेत्र के मेन रोड, बंगाली टोला, बिरसा टोली, टीचर्स कॉलोनी और क्रिस्तान टोली सहित कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 2010 में ग्रामीण जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की इस योजना का संचालन स्थानीय स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाता है। जलापूर्ति के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में डीप बोरिंग और पंप हाउस बनाया गया है, जबकि प्रखंड कार्यालय परिसर में ओवरहेड टैंक स्थापित है। इस योजना पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।

हालांकि, करीब डेढ़ दशक से यह योजना लगातार समस्याओं से जूझ रही है। समिति की निष्क्रियता, कुछ उपभोक्ताओं की मनमानी और विभागीय उदासीनता के कारण योजना का संचालन प्रभावित होता रहा है। दो महीने पहले पंप हाउस में लगा 12.5 एचपी मोटर जल जाने के बाद से जलापूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। गर्मी के मौसम में पानी की आपूर्ति ठप रहने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलापूर्ति योजना शुरू होने के बाद से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और सोलर जलमीनारों के रखरखाव पर भी ध्यान देना कम कर दिया है, जिससे वैकल्पिक पेयजल स्रोत भी प्रभावित हुए हैं।

पाइपलाइन लीकेज और निर्माण त्रुटियां बनी बड़ी समस्या
योजना के तहत बाजार क्षेत्र में घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन नियमित रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज हो गया है। इसके कारण जलापूर्ति बार-बार प्रभावित होती रही है।
बताया जा रहा है कि इंदिरा चौक के पास पाइपलाइन में लीकेज के कारण करीब एक वर्ष से मेन रोड और स्टेशन रोड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित थी। इसके अलावा निर्माण कार्य में तकनीकी त्रुटियों की भी शिकायतें सामने आई हैं। पंप हाउस और ओवरहेड टैंक के बीच अधिक दूरी तथा पाइपलाइन बिछाने के दौरान स्थानीय विरोध के कारण बदले गए लेआउट को भी मौजूदा समस्याओं का कारण माना जा रहा है।

उपभोक्ताओं द्वारा शुल्क नहीं जमा करने से बढ़ी परेशानी
जलापूर्ति संचालन समिति के पदाधिकारी महेंद्र गंजू ने बताया कि योजना के संचालन और रखरखाव के लिए समिति को स्वयं फंड की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके लिए विभाग द्वारा निर्धारित 100 रुपये प्रतिमाह उपभोक्ता शुल्क लिया जाता है। हालांकि, अधिकांश उपभोक्ता समय पर शुल्क जमा नहीं करते, जिससे मरम्मत और रखरखाव के लिए आवश्यक राशि जुटाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त फंड नहीं होने के कारण मोटर मरम्मत और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है।

