जमशेदपुर | पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मिडल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब झारखंड के सड़क निर्माण कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों से आने वाली बिटुमिनस (अलकतरा) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम जिले में सड़क निर्माण की नई परियोजनाएं लगभग ठप हो गई हैं। बढ़ती लागत के कारण ठेकेदारों ने कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है।

दामों में भारी उछाल, बजट से बाहर हुआ निर्माण
सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला प्रमुख कच्चा माल बिटुमिनस अब काफी महंगा हो चुका है। कुछ महीने पहले इसकी कीमत 40,000 से 50,000 रुपये प्रति टन के बीच थी, जो अब बढ़कर 61,000 से 1,00,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है।
तकनीकी रूप से, एक किलोमीटर सड़क निर्माण में कुल सामग्री का लगभग 5 से 8 प्रतिशत हिस्सा बिटुमिनस का होता है। हालांकि, मौजूदा कीमतों ने प्रति किलोमीटर लागत को इतना बढ़ा दिया है कि पुराने टेंडर रेट पर काम करना ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
नई परियोजनाओं पर लगा ब्रेक
जमशेदपुर पथ प्रमंडल के कार्यपालक पदाधिकारी दीपक सहाय के अनुसार, फिलहाल मरम्मत कार्य किसी तरह जारी है, लेकिन नई परियोजनाओं की शुरुआत नहीं हो पा रही है। हाल ही में टेंडर प्राप्त करने वाले कई संवेदकों ने कार्य शुरू करने से इनकार कर दिया है।

ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा बाजार दरों पर कच्चा माल खरीदकर परियोजनाओं को पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने विभाग से कम से कम एक महीने की मोहलत मांगी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति सामान्य हो सके।
NHAI के लक्ष्यों पर भी असर
रांची स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक विजय कुमार ने भी स्थिति को गंभीर बताया है। उनके अनुसार, युद्ध जैसे हालात के चलते लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण मालवाहक जहाजों का किराया और बीमा लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव बिटुमिनस की कीमतों पर पड़ा है।
आगे की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो झारखंड में सड़क निर्माण की रफ्तार लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। इसका असर न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर पड़ेगा, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

