जगन्नाथपुर | पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकु ने कोल्हान हितैषी पुस्तकालय सह यूथ क्लब, जगन्नाथपुर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार अनुसूचित जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आदिवासियों को आरक्षण की सुविधा दी गई है, उसी प्रकार झारखंड विधानसभा में भी आदिवासियों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व देने के लिए उनकी सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरुथान अभियान राज्यभर में जन-जागरण अभियान चलाएगा।
चित्रसेन सिंकु ने आगे कहा कि उन्होंने देश के 10 अनुसूचित राज्यों में परिसीमन के बाद आदिवासी आरक्षित सीटों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया है।

उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्ष 2027 में परिसीमन प्रस्तावित है, जिसमें परिसीमन आयोग जनसंख्या को मुख्य आधार बनाता है।
हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि अनुसूचित क्षेत्रों में खदान, फैक्ट्री और अन्य व्यवसायों के कारण बाहरी आबादी तेजी से बढ़ी है। इस पर राज्यपाल और संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस नियंत्रण नहीं लगाया गया, जिसके लिए आदिवासी समुदाय जिम्मेदार नहीं है।

उन्होंने मांग की कि झारखंड के सभी अनुसूचित जिलों में परिसीमन के दौरान केवल जनसंख्या को ही आधार न बनाया जाए, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार और उनके अपेक्षित प्रतिनिधित्व की मूल भावना को भी प्राथमिकता दी जाए।
प्रेस वार्ता में उपस्थित प्रमुख लोग:
केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकु, जिला अध्यक्ष नारायण सिंह पुरती, उपाध्यक्ष विकास केराई, सचिव शैली शैलेन्द्र सिंकु, स्टूडेंट्स विंग के केंद्रीय अध्यक्ष अरिल सिंकु, जगन्नाथपुर प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ बोबोंगा, केंद्रीय सलाहकार सदस्य जगदीश चंद्र सिंकु, सुमंत ज्योति सिंकु, संस्थापक सदस्य ऋषि सिंकु, विनीत लागूरी, युवा नेता मंजीत कोड़ा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

