सेरेंगसिया ऐतिहासिक शहीद स्थल को लेकर जिला प्रशासन के रवैये की मानकी मुण्डा संघ ने की कड़ी निंदा

चाईबासा : टोंटो (पश्चिमी सिंहभूम) सिरिंगसिया घाटी  में शहीद स्मारक 2 फरवरी को आयोजित होने वाली वार्षिक शहीद दिवस को लेकर चल रहे विवाद के बीच। चन्दन होनहागा
महासचिव,मानकी मुण्डा संघ,कोल्हान पोड़ाहाट केन्द्रीय समिति पश्चिमी सिंहभूम,ने लेटर जारी करते हुए लिखा है।
पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टोंटो प्रखंड में स्थित सेरेंगसिया ऐतिहासिक शहीद स्थल (कोल विद्रोह 1831–32) जल, जंगल, जमीन एवं आदिवासी अस्तित्व की रक्षा के लिए अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध शहादत देने वाले वीर आदिवासी शहीदों की पावन रणभूमि रही है।
इन महान शहीदों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 02 फरवरी को दिरि दुल-सुनूम सहित श्रद्धांजलि दिवस का आयोजन स्थानीय ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। यह स्थल केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से आमजन एवं शोधकर्ता श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।
मानकी मुण्डा संघ, कोल्हान पोड़ाहाट केन्द्रीय समिति, पश्चिमी सिंहभूम ने आरोप लगाया है कि इस वर्ष 02 फरवरी से पूर्व जिला प्रशासन द्वारा जिस प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न की जा रही हैं, वह निंदनीय है तथा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था (मानकी-मुण्डा व्यवस्था) और शहीद स्थल व्यवस्थापक के निर्णयों के विरुद्ध है।
संघ ने जिला प्रशासन द्वारा सेरेंगसिया शहीद स्थल व्यवस्थापक के खिलाफ अपनाए जा रहे कथित मनमाने रवैये की कड़ी निंदा की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि कोल्हान पोड़ाहाट क्षेत्र की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था मौजा-सेरेंगसिया के ग्रामीणों एवं शहीद स्थल संरक्षक समिति के साथ मजबूती से खड़ी है और रहेगी।
मानकी मुण्डा संघ ने जिला प्रशासन से विनम्र लेकिन स्पष्ट मांग की है कि सेरेंगसिया शहीद स्थल को किसी भी प्रकार का राजनीतिक अखाड़ा न बनाया जाए तथा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रामीणों को श्रद्धापूर्वक अपना पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाए। साथ ही ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

By maskal.news

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