किरीबुरु : किरीबुरु स्थित आदिवासी कल्याण केंद्र में शनिवार को आदिवासी हो समाज महासभा के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन की शुरुआत दियूरी धनुर्जय लागुरी द्वारा बोंगा बुरु अनुष्ठान से हुई। इसके बाद महासभा का ध्वजारोहण एवं हो समाज की सामूहिक प्रार्थना (गोवारी) संपन्न कराई गई।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन आदिवासी कल्याण केंद्र के अध्यक्ष श्री हीरालाल सुंडी, श्री करम्पदा मुंडा एवं श्री राजेश मुंडा ने संयुक्त रूप से किया। इसके पश्चात प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में “केया-केपेया आंदी” (भाग कर शादी) की सामाजिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि बाला अनुष्ठान के दौरान विवाह संपन्न करना हो समाज की परंपरा के विरुद्ध है। समाज की परंपरा के अनुसार लड़की के घर बाला में लड़के का जाना तथा लड़के के घर बाला में लड़की का जाना मान्य नहीं है। अतः बाला के दौरान विवाह की प्रक्रिया को अमान्य घोषित किया गया और समाज से परंपराओं में मनमाने बदलाव न करने की अपील की गई।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि भाग कर शादी की प्रथा मान्य रहेगी, लेकिन इसके लिए घर के आंगन में ससंग-सुनुम एवं आदिंग-हेबे आदेर की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद अजिहनर के रूप में लड़की पक्ष के लोगों के लड़के के घर आने पर ही बाला संपन्न किया जाएगा।
बैठक में हो समाज की महत्वपूर्ण परंपरा ‘मारंग बोंगा’ पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि प्रत्येक किली (गोत्र) का अपना ऐतिहासिक महत्व होता है, जिसे मारंग बोंगा के रूप में सम्मान दिया जाता है। कई किलियों में यह परंपरा विलुप्त होती जा रही है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए महासभा ने सभी किलियों से संबंधित विधान एवं ऐतिहासिक विवरण आमंत्रित करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर महासभा के अध्यक्ष श्री मुकेश बिरुवा ने बिरुवा किली के मारंग बोंगा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिरुवा किली के लोग वर्तमान में लगभग 84 गांवों में निवास करते हैं और उनके पूर्वज विभिन्न क्षेत्रों से प्रवास करते हुए यहां बसे। अधिवेशन में फिलहाल केवल बिरुवा किली का मारंग बोंगा महासभा को सौंपा गया।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि अंतर्जातीय विवाह को हो समाज में मान्यता नहीं दी जाएगी तथा ऐसे विवाहों में किसी भी पारंपरिक पूजा-पाठ या घर के आदिंग में स्थान नहीं होगा। साथ ही रिंग सेरेमनी को भी हो समाज की पारंपरिक विवाह व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
अधिवेशन में सोमा कोड़ा, चैतन्य कुंकल, बामिया बारी, छोटेलाल तामसोय, माधव चंद्र कोड़ा, रोया राम चंपिया, गोपी लागुरी, रमेश लागुरी, बलभद्र बिरुली, श्याम बिरुवा, अमर बिरुवा, जयराम पाट पिंगुवा, भूषण लागुरी, पुतकर लागुरी, अमरसिंह सुंडी, नीलिमा पुरती, गीता लागुरी, पदमुनि लागुरी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
18
Jan

