चाईबासा : झारखंड में 45 लाख बच्चों की परीक्षाएँ पिछले 8 महीनों से ठप पड़ी हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान नाच-गान, मेला, मंच और सरकारी कार्यक्रमों पर है। शिक्षा जैसी गंभीर व्यवस्था को बुरी तरह ध्वस्त कर देने वाली यह स्थिति अभिभावकों और छात्रों को गहरी चिंता में डाल रही है।
एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक अखबार की कटिंग ही अबुआ सरकार की सच्चाई बयान करने के लिए काफी है। कार्यक्रमों की धूम है, लेकिन बच्चों का भविष्य अंधेरे में पड़ा है।
उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही बची है, बच्चों की परीक्षा रोक देना।
पेरियार ने सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना दिया गया है। सरकार जश्न मना रही है, जबकि 45 लाख बच्चों का भविष्य राख किया जा रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात है।
प्रशासन मौन, जवाबदही गायब
पेरियार ने कहा कि प्रशासन सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त है, लेकिन बच्चों की परीक्षा की तिथि पर न कोई जवाब है, न मंशा। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह राज्य के भविष्य को कुचलने की सरकारी नीति है।
अभिभावकों में हताशा-स्कूलों में भय का माहौल
लगातार 8 महीनों से परीक्षा रुकी होने से बच्चों की पढ़ाई की लय टूट चुकी है। अभिभावक चिंता में हैं, स्कूलों का पूरा अकादमिक कैलेंडर चरमरा गया है और पढ़ाई पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
शिक्षा विभाग अब तक किसी स्पष्ट समय-सारिणी की घोषणा नहीं कर पाया है। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पेरियार ने कहा, जो सरकार भविष्य रोक दे, वह विकास का दावा किस मुंह से कर सकती है?
24
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