चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के सुदूर जंगल और पहाड़ी इलाकों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे गांवों में हाथियों की नियमित आवाजाही, फसलों की भारी तबाही, घरों को नुकसान और जानमाल के खतरे ने आम लोगों को दहशत में जीने को मजबूर कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ग्रामीण रात में घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रभावित इलाकों से लगातार सूचनाएं मिल रही हैं कि सिंगल हाथी गांवों और खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं, कई स्थानों पर आवागमन बाधित हो गया है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। जंगल-पहाड़ से सटे गांवों में जनजीवन लगभग ठप होता जा रहा है।
वन विभाग द्वारा हाथी नियंत्रण को लेकर दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेकाबू हैं। न तो प्रभावी अलर्ट सिस्टम काम कर रहा है और न ही पर्याप्त गश्ती दल दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित परिवारों को समय पर मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था न मिलने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इस संबंध में गोप, गौड़ आरक्षण आंदोलन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने अपील करते हुए कहा कि पश्चिम सिंहभूम में हाथियों का बढ़ता आतंक अब केवल वन्यजीव समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट बन चुका है। ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं, जबकि प्रशासन और विभागीय दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कागजी योजनाओं से नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी कार्रवाई से ही लोगों की जान बचाई जा सकती है।
रामहरि ने जनता से अपील की कि वे अत्यंत सतर्क रहें, हाथियों को किसी भी स्थिति में उकसाएं नहीं, उनके रास्ते में न जाएं और रात के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने जोर देकर कहा, आपका जीवन बेहद कीमती है।
साथ ही उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की कि हाथी प्रभावित गांवों में 24×7 निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, त्वरित चेतावनी (अलर्ट) सिस्टम को प्रभावी बनाया जाए, हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर चिन्हित कर अतिक्रमण हटाया जाए, अतिरिक्त गश्ती दल तैनात किए जाएं और पीड़ित परिवारों को शीघ्र एवं पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
अंत में रामहरि ने कहा कि मानव जीवन सर्वोपरि है। जब तक ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस मुद्दे पर आवाज उठती रहेगी और प्रशासन को इसकी पूरी जवाबदेही लेनी
09
Jan

