जगन्नाथपुर : जैतगढ़ एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगभग 45 जंगली हाथियों का विशाल झुंड पिछले एक सप्ताह से आतंक मचा रहा है। चार पंचायतों — पत्ताजैंत, सियालजोड़ा, कसेरा और तोडंगहटू के दो से अधिक दर्जन गांवों की धान और सब्जी की तैयार फसलें बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है, वहीं वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
दो झुंडों में विभाजित, फिर हुए एकजुट
मिली जानकारी के अनुसार हाथियों का यह झुंड दो हिस्सों में बंटा था :-
23 हाथी दीदीबरु जंगल में,
22 हाथी दावबेड़ा बिट में डेरा डाले हुए थे।
शुक्रवार को दोनों झुंड कोकुआ नाला के पास आकर एकजुट हो गए, जिसके बाद शनिवार दोपहर इन्हें जैतगढ़–जगन्नाथपुर मुख्य मार्ग पर रोगाढ़ा के पास विचरण करते देखा गया। बेलपोसी गांव के निकट मुख्य सड़क से एक किलोमीटर दूर भी बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथियों को देखने पहुंचे।
खेतों में हो रहा भारी नुकसान
किसान मित्र श्रीनिवास तिरिया ने बताया कि सूर्यास्त होते ही हाथी खेतों की ओर रुख कर लेते हैं। धान की तैयार फसल के साथ-साथ सब्जी बागानों का भी भारी नुकसान हो रहा है। अब तक चार पंचायतों के दो दर्जन से अधिक किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं।
वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है, जबकि हाथी अब आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगे हैं। सुरक्षा के अभाव में ग्रामीण टीना पीटकर और पटाखे छोड़कर खुद ही हाथियों को भगाने का जोखिम उठा रहे हैं। परिणामस्वरूप शाम होते ही गांवों की सड़कें सुनसान हो जाती हैं और मुख्य सड़क पर भी लोगों का आना-जाना कम हो गया है।
शुक्रवार शाम को हाथी जैतगढ़–जगन्नाथपुर मुख्य सड़क पर भी घूमते देखे गए, जिसके बाद ग्रामीणों में डर और बढ़ गया।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि हाथियों के इस बढ़ते खतरे से फसलों और मानव जीवन को बचाया जा सके। स्थिति को देखते हुए जल्द ही राहत व सुरक्षा उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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