घाटशिला : घाटशिला उपचुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के बड़े दावे इस चुनाव में कमजोर साबित हुए। रिपोर्टों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के बाद अब अन्य वर्गों में भी भाजपा के प्रति नाराज़गी देखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर पार्टी नेताओं की ज़मीनी सक्रियता कम होने को भी हार की एक वजह माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, झारखंड भाजपा को बिहार जैसे अन्य राज्यों से संगठनात्मक मजबूती और जनाधार वाले नेताओं को आगे लाने का सबक लेना चाहिए। केवल हाई-प्रोफाइल राजनीति और आंतरिक गुटबाज़ी से चुनावी प्रदर्शन सुधरना मुश्किल माना जा रहा है।
उधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की लोकप्रियता में इस जीत के बाद और इज़ाफ़ा हुआ है। घाटशिला की जीत को राज्य सरकार के एक वर्ष के कामकाज पर मुहर के रूप में देखा जा रहा है। जनता ने दिवंगत रामदास सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए सोमेश सोरेन को बड़ी जीत दिलाई।
वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन की मेहनत की सराहना की जा रही है, हालांकि भाजपा की आंतरिक चुनौतियों को हार का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
नवनिर्वाचित विधायक सोमेश सोरेन को बधाइयाँ दी जा रही हैं। स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि वे रामदास सोरेन के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाते हुए घाटशिला के विकास को तेज़ गति देंगे।
16
Nov

