रांची : प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समनों की अवहेलना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दी गई अंतरिम राहत को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद अब उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल के दौरान सशरीर उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2024 को अपने अंतरिम आदेश में मुख्यमंत्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थित से राहत दी थी। हालांकि, मौजूदा आदेश के बाद यह राहत खत्म हो गई है। इससे पहले निचली अदालत ने भी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला ईडी द्वारा जारी किए गए समनों से जुड़ा है। लैंड स्कैम समेत कई संवेदनशील मामलों में पूछताछ के लिए ईडी ने पहली बार 14 अगस्त 2023 को हेमंत सोरेन को बुलाया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद लगातार 10 बार समन जारी किए गए, मगर मुख्य मंत्री हर बार गैरहाज़िर रहे। अंततः 10वें समन के बाद उन्होंने पूछताछ के लिए सहमति दी।
इसके बाद ईडी की टीम सीएम हाउस पहुंची और दो दिनों की पूछताछ के बाद 31 जनवरी 2024 को सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके गिरफ्तार होते ही राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला। उसी शाम उन्होंने राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
2 फरवरी 2024 को झामुमो विधायक चंपाई सोरेन ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
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