स्वर्णरेखा नदी में प्रदूषण का कहर, सैकड़ों मरी मछलियां मिलने से हड़कंप

जमशेदपुर | लौहनगरी की जीवनरेखा मानी जाने वाली स्वर्णरेखा नदी में बढ़ता प्रदूषण अब गंभीर और भयावह रूप लेता जा रहा है। बुधवार को शहर के बाबूडीह लाल भट्ठा क्षेत्र में नदी किनारे बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई क्विंटल मछलियां पानी की सतह पर तैरती हुई देखी गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न हो गया है।

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सुबह जब स्थानीय लोग बाबूडीह घाट पहुंचे, तो वहां का दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था। नदी किनारे और पानी की सतह पर बड़ी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में पड़ी थीं। चिंताजनक बात यह भी रही कि खतरे से अनजान कुछ लोग इन मरी हुई मछलियों को इकट्ठा कर अपने साथ ले जाते हुए भी नजर आए, जिससे संभावित स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मछलियों की इस सामूहिक मौत का मुख्य कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) हो सकता है। औद्योगिक कचरे और बिना शोधन के सीवरेज के सीधे नदी में गिरने से बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर 4 mg/L से नीचे चला जाता है। यह स्थिति जलीय जीवों के लिए घातक साबित होती है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक रसायनों से बढ़ता अमोनिया स्तर समस्या को और गंभीर बना देता है।

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इस घटना के बाद जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2010 में स्वर्णरेखा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से बनाई गई योजना अब तक धरातल पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है। झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आई है।

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स्थानीय निवासियों ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र और शहर की बड़ी कंपनियों पर आरोप लगाया है कि वे अपना दूषित पानी अवैध रूप से सीधे नदी में छोड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण स्वर्णरेखा नदी धीरे-धीरे ‘जहरीली नदी’ में तब्दील होती जा रही है।
बाबूडीह घाट की यह घटना न केवल पर्यावरणीय उपेक्षा का गंभीर उदाहरण है, बल्कि प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्वर्णरेखा नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

By maskal.news

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