मनरेगा कर्मियों की हड़ताल 83वें दिन भी जारी, कांग्रेस नेतृत्व से मिलकर रखीं मांगें

रांची | झारखंड राज्य के मनरेगा कर्मियों की हड़ताल शनिवार को 83वें दिन भी जारी रही। इस दौरान मनरेगा कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने के. राजू तथा केशव महतो कमलेश से मुलाकात कर अपनी लंबित मांगों और आंदोलन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने सरकार से संवाद और संवेदनशीलता के साथ पहल करने की अपील करते हुए कहा कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाला जाए।

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प्रतिनिधियों ने कहा कि मनरेगा कर्मियों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से प्रेरित नहीं है, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों, सम्मानजनक सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि लगभग दो दशकों से मनरेगा योजनाओं के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हजारों कर्मी आज भी बेहद कम मानदेय पर कार्य करने को विवश हैं।

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मनरेगा कर्मियों के अनुसार, एक ओर राज्य मनरेगा कोषांग में कार्यरत कर्मचारियों को ग्रेड-पे सहित विभिन्न सुविधाएं प्राप्त हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत हजारों मनरेगा कर्मियों को मात्र 12 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर पूर्णकालिक सेवाएं देनी पड़ रही हैं। इसके अलावा 8 से 10 माह का बकाया मानदेय भी अब तक भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

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प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्षों की सेवा अवधि के दौरान 156 मनरेगा कर्मियों का निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिवार आज भी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि दिवंगत कर्मियों के आश्रितों के लिए ठोस कल्याणकारी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


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कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में कई बार सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौते हुए तथा विभिन्न मांगों पर सहमति भी बनी, लेकिन उनका पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका। इससे कर्मचारियों के बीच विश्वास का संकट उत्पन्न हुआ है। इसके बावजूद कर्मचारी संघर्ष के बजाय संवाद और समाधान के पक्षधर हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण विकास मंत्री, विभागीय सचिव एवं आयुक्त से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाए। उन्होंने मंत्री से स्वयं पहल कर कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ सार्थक एवं परिणामोन्मुखी वार्ता सुनिश्चित करने की मांग की।


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मनरेगा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा, नियमित सेवा व्यवस्था और लंबित मानदेय के भुगतान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में मनरेगा योजना को मजबूत बनाना चाहती है, तो सबसे पहले मनरेगा कर्मियों को सशक्त और सुरक्षित बनाना होगा। यही राज्यहित, जनहित और ग्रामीण विकास के लिए सबसे आवश्यक कदम है।

By maskal.news

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