चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले से लगभग 13–14 वर्ष पहले लापता हुआ एक बालक आखिरकार केरल के कन्नूर जिले में सुरक्षित मिला है। उस समय महज 5–6 वर्ष की उम्र में भटककर केरल पहुंच गया यह बच्चा अब लगभग 18 वर्ष का हो चुका है। लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण वह अपनी मातृभाषा, गांव और जिले का नाम तक भूल चुका था। उसे केवल अपने पिता बलराम, माता मानी, भाई फंटूश और छोटी बहन टुरकी के नाम तथा घर के पहाड़ पर होने की धुंधली यादें ही थीं।

बालक अब तक एनजीओ और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के संरक्षण में केरल में रह रहा था। उम्र 18 वर्ष के करीब पहुंचने के कारण उसे संस्था में रखने की सीमा समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसके परिवार को खोजने की प्रक्रिया तेज की गई।
सोशल मीडिया से मिला परिवार का सुराग
परिवार का कोई ठोस पता नहीं मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता बासिल हेम्ब्रोम ने बच्चे का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में बच्चे ने अपनी यादों के आधार पर घर और परिवार का विवरण बताया तथा लोगों से पहचान कराने की अपील की गई। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों तक पहुंच गया।
इसी दौरान वीडियो परिवार के एक सदस्य हिम्मत गोप तक पहुंचा, जिन्होंने “ग्रामीण विमर्श” टीम से संपर्क किया। इसके बाद खोजबीन करते हुए टीम को सोनुवा प्रखंड के आसनतलिया पंचायत अंतर्गत हाड़ीमारा गांव में बच्चे के परिवार की जानकारी मिली।

अब परिवार में सिर्फ मां और तीन बहनें
ग्रामीण विमर्श के सदस्य जब हाड़ीमारा गांव पहुंचे तो पाया कि बालक का घर पहाड़ पर स्थित है, लेकिन वहां कोई नहीं रहता और घर बंद पड़ा है। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि परिवार कई वर्ष पहले ही रोज़गार की तलाश में पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित एक ईंट भट्ठा में काम करने चला गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के पिता बोड़राम गोप और बड़े भाई फंटूश गोप का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार में मां मानी गोप, बहनें बलेमा गोप, परमिला गोप, लक्ष्मी गोप और भतीजी स्वीटी गोप ही हैं, जो ईंट भट्ठे में मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे हैं।
राजा के भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति देखकर चिंता जताई कि यदि बालक वापस घर आता है तो क्या उसे शिक्षा और बेहतर वातावरण मिल पाएगा। लोगों का कहना है कि गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है और वह भी कम उम्र में मजदूरी के दायरे में फंस सकता है।
NIOS से +2 में दाखिला और केरल में फुटबॉल से बनाई पहचान
बालक, जिसे अब राजा के नाम से पहचाना जा रहा है, ने केरल में रहते हुए फुटबॉल में अपनी प्रतिभा दिखाई। वह इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब Kerala Blasters FC की जूनियर टीम से भी जुड़ा रहा, जिससे उसे राज्य स्तर पर पहचान मिली है।
वह वर्तमान में National Institute of Open Schooling (NIOS) से उच्च माध्यमिक (+2) की पढ़ाई कर रहा है। पदाधिकारियों के अनुसार क्लब से जुड़े रहने के कारण उसे नियमित स्कूलिंग कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था, इसलिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी गई। बताया जा रहा है कि राजा फुटबॉल में काफी प्रतिभाशाली है और भविष्य में इस खेल में अच्छा करियर बना सकता है।
सामाजिक संगठनों की पहल से मिली सफलता
मामले में नया मोड़ तब आया जब “मिसिंग फाउंड” ग्रुप में बच्चे की तस्वीर साझा हुई। इसके बाद मुंबई प्रोजेक्ट को लीड कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता फरदीन खान (Railway Children India) ने परिवार खोजने की जिम्मेदारी उठाई। फरदीन खान झारखंड के कोडरमा जिले के निवासी हैं और पिछले सात वर्षों से हजारों बच्चों को उनके परिवार से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

खोज के दौरान उनके सहयोगी शुभम तिग्गा (इंडियन एक्सप्रेस) तथा स्थानीय सोशल मीडिया क्रिएटर्स आयुष और बासिल हेम्ब्रोम की मदद से वीडियो तैयार किया गया। वीडियो लगभग 10 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने संपर्क किया।
बालक की मां ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने अपने बेटे के जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी और उसे मृत मान लिया था। अब उसके मिलने की खबर से परिवार बेहद खुश है।

जल्द हो सकेगा परिवार से मिलन
फिलहाल फरदीन खान और उनकी टीम संबंधित सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कराने में जुटी है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही बालक को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाया जाएगा।

यह घटना साबित करती है कि समर्पण, टीमवर्क और सोशल मीडिया की ताकत से वर्षों पुरानी बिछड़न भी समाप्त की जा सकती है।


