चाईबासा : पाताहातु मागे पर्व के पावन अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं पूर्व सांसद गीता कोड़ा सपरिवार अपने पैतृक गांव पाताहातु पहुंचे। इस दौरान दोनों ने गांव में आयोजित पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और दिऊरियों के साथ आदिवासी परंपरा के अनुसार सिंहबोंगा की गोवारी (अर्चना) की।

पर्व के अवसर पर दिऊरियों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए देशाउली से प्रार्थना की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक माहौल से पूरा गांव उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

इस अवसर पर मधु कोड़ा ने कहा कि मागे पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी ग्रामीणों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे और विकास की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। वहीं गीता कोड़ा ने भी ग्रामीणों के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की उन्नति और लोगों के कल्याण की कामना की।

मागे पर्व के अवसर पर पाताहातु गांव में पारंपरिक आस्था, संस्कृति और सामूहिक एकजुटता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।

