जमशेदपुर/डुमरिया | झारखंड जनशक्ति क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष वीरसिंह देवगम ने उपायुक्त (डीसी) को ज्ञापन सौंपकर डुमरिया प्रखंड में मनरेगा के तहत संचालित आम बागवानी योजना में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

उपायुक्त को सौंपे गए पत्र में श्री देवगम ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2020 में केंदुआ पंचायत के रांगामटिया गांव निवासी विधवा महिला श्रीमती छीता मार्डी (पति स्वर्गीय भोगल मार्डी) की भूमि पर मनरेगा के तहत आम बागवानी योजना स्वीकृत की गई थी। हालांकि, योजना स्थल पर आम के पौधे लगाए बिना ही योजना की राशि की निकासी कर योजना को बंद कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता सिर्मा देवगम ने प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने झारखंड सरकार के उप सचिव एम.डी. हुसैन के माध्यम से संबंधित विभाग से 15 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शिकायत की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने अपने विरुद्ध संभावित कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से लाभुक श्रीमती छीता मार्डी के घर जाकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि अधिकारियों ने उनसे जबरन अंगूठा निशान लेने की कोशिश की, लेकिन लाभुक द्वारा इनकार किए जाने पर कथित रूप से फर्जी अंगूठा निशान लगाकर अपने पक्ष में जांच रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि आम बागवानी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, योजना की घेराबंदी की गई है तथा लाभुक को खाद भी उपलब्ध कराई गई है। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है। उनके अनुसार संबंधित भूमि पर न तो आम के पौधे लगाए गए हैं, न ही घेराबंदी की गई है और न ही लाभुक को खाद उपलब्ध कराई गई है। योजना स्थल पर केवल गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं।

वीरसिंह देवगम ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा मनरेगा कनीय अभियंता बाबूलाल हेम्ब्रम, सहायक अभियंता राज शंकर मुर्मू एवं पंचायत राज पदाधिकारी चंडी चरण भोल सहित दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।


