जगन्नाथपुर: एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामहरि पेरियार ने पश्चिम सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बालंडिया–हाटगम्हरिया मुख्य मार्ग पर कालीमटी और हाटगम्हरिया के बीच संचालित एक अवैध ईंट भट्टे के मामले को गंभीर पर्यावरणीय अपराध बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रामहरि पेरियार ने कहा कि क्षेत्र में खुलेआम अवैध ईंट भट्टा संचालित किया जा रहा है और ईंट पकाने के लिए बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर उन्हें भट्टों में जलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मशीनों की मदद से जंगल के बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर भट्टों में झोंक दिया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति है कि एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाने और पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उसी व्यवस्था की नाक के नीचे जंगलों की अंधाधुंध कटाई कर अवैध ईंट भट्टों का संचालन किया जा रहा है। यह स्थिति कहीं न कहीं जिम्मेदार विभागों की लापरवाही, उदासीनता या संभावित मिलीभगत की ओर भी इशारा करती है।

रामहरि पेरियार ने कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग वास्तव में सक्रिय होते, तो किसी भी व्यक्ति की इतनी हिम्मत नहीं होती कि खुलेआम पेड़ काटकर अवैध भट्टा संचालित करे। यह केवल पर्यावरण के साथ खिलवाड़ ही नहीं, बल्कि कानून और सरकारी व्यवस्था की खुली अवहेलना भी है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही अवैध रूप से संचालित ईंट भट्टे को तत्काल बंद कराने और पेड़ों की अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि किन अधिकारियों की लापरवाही या संरक्षण के कारण इस प्रकार की अवैध गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं।

रामहरि पेरियार ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन द्वारा इस गंभीर मामले में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो एंटी करप्शन ऑफ इंडिया इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगा और पर्यावरण संरक्षण तथा जनहित के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को भी बाध्य होगा।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी फाइलों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर भी सख्ती से लागू किया जाना आवश्यक है। जंगल और पर्यावरण किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं, जिन्हें इस तरह नष्ट होने देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

