सरायकेला: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां रमाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में आदर्श नगर, गम्हरिया स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में महिलाओं के कानूनी अधिकारों के संबंध में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंबिका चरण पानी, सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल, सरायकेला-खरसावां ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या या शिकायत होने पर महिलाएं किन-किन संस्थाओं और अधिकारियों से संपर्क कर सकती हैं तथा किस प्रकार उन्हें कानूनी सहायता प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी एक्ट, 1987 की धारा 12 के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रावधान के अंतर्गत महिलाओं सहित पात्र व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही उन्होंने जिला स्तर पर कार्यरत लीगल एड डिफेंस काउंसिल द्वारा प्रदान की जाने वाली कानूनी सेवाओं और उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं का राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाते हुए समाज और देश की प्रगति में अहम भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए बनाए गए विभिन्न संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए उपस्थित महिलाओं से अपील की कि वे अपने स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अन्य महिलाओं को भी जागरूक करें और उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम में आदर्श नगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र के पैरा लीगल वालंटियर्स भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया तथा स्थानीय लोगों के बीच विधिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर बताया गया कि पैरा लीगल वालंटियर्स द्वारा ब्लॉक एवं पंचायत स्तर पर भी समय-समय पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं और आम नागरिकों को उनके अधिकारों तथा उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में जागरूक करना है।
कार्यक्रम में स्थानीय महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा समुदाय के अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

