चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष धी. रमहरि पेरियार ने उपायुक्त, पश्चिम सिंहभूम को सौंपे गए ज्ञापन में जिले के दो गंभीर एवं अत्यंत चिंताजनक मामलों पर कड़ा विरोध दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति पर निजी कब्जा, छात्राओं के आवास का व्यावसायीकरण तथा कॉलेज की इमारत को निजी उपयोग में देना—किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और यह सीधे-सीधे छात्रों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
1. SC/ST छात्रावासों पर निजी कब्जा : छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों पर सीधा आघात SC/ST छात्राओं के लिए निर्मित छात्रावासों को निजी व्यक्तियों/संस्थाओं द्वारा स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में कब्जा कर लिया गया है।
यह स्थिति अनुच्छेद 14, 15(4), 21 और 21A के स्पष्ट उल्लंघन के साथ-साथ सरकारी धन, सार्वजनिक संपत्ति एवं छात्राओं की सुरक्षा—तीनों के साथ खिलवाड़ है।
एंटी करप्शन ऑफ इंडिया ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, मिलीभगत और गहरी पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का परिणाम बताया है।
सरकारी छात्रावास को निजी व्यावसायिक केंद्र में बदल देना, शासन-प्रणाली की असफलता का जीवंत उदाहरण है।
2. जी.सी. जैन कॉमर्स कॉलेज : जर्जर भवन में कक्षाएँ, नया भवन निजी संस्थान को सौंपे जाने का गंभीर आरोप कॉलेज का पुराना भवन गंभीर रूप से जर्जर और खतरनाक घोषित होने योग्य है, फिर भी छात्र-छात्राएँ उसी में अध्ययन को मजबूर हैं।
दूसरी ओर सरकारी धन से निर्मित नई और सुरक्षित इमारत को एक निजी स्किल डेवलपमेंट संस्था को उपयोग हेतु दिए जाने का आरोप सामने आया है।
यह कार्रवाई UGC मानकों, राज्य सरकार/शिक्षा विभाग के नियमों, तथा पब्लिक प्रॉपर्टी उपयोग संबंधी कानूनों, का खुला उल्लंघन है।
*संगठन की 6 प्रमुख माँगें 72 घंटे की समयसीमा*
धी. रमहरि पेरियार ने उपायुक्त को लिखित रूप से निम्नलिखित माँगें रखी हैं :
1. SC/ST छात्रावासों और कॉमर्स कॉलेज के नए भवन से 72 घंटे के भीतर सभी निजी कब्जों को हटाया जाए।
2. कॉलेज की नई इमारत को तत्काल शिक्षण कार्य हेतु बहाल किया जाए।
3. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच गठित की जाए।
4. जर्जर भवन की तकनीकी/सिविल सुरक्षा जाँच कर उसे सुरक्षित बनाया जाए या अस्थायी रूप से बंद किया जाए।
5. जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
6. भविष्य में सरकारी सम्पत्ति के दुरुपयोग को रोकने हेतु कठोर नीति और निगरानी तंत्र लागू किया जाए।
यह किसी व्यक्ति का विवाद नहीं, यह हमारी बेटियों की सुरक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य का प्रश्न है।
धी. पेरियार ने कहा कि सरकारी धन से बने छात्रावासों और कॉलेज भवनों को निजी संस्थाओं को सौंपना केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से विश्वासघात है। हम उम्मीद करते हैं कि जिला प्रशासन संविधान और कानून के दायरे में तुरंत, कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई करेगा।
महिला (SC/ST) छात्रावासों पर निजी कब्जा व जी.सी. जैन कॉमर्स कॉलेज के सरकारी भवनों के दुरुपयोग पर धी. रमहरि पेरियार की कड़ी आपत्ति, 72 घंटे में कार्रवाई की अल्टीमेटम

