रांची : झारखंड प्रदेश में संचालित ई-कल्याण छात्रवृत्ति योजना की आधिकारिक वेबसाइट की तकनीकी खामियों ने हजारों छात्र-छात्राओं को गंभीर परेशानी में डाल दिया है। राज्य सरकार द्वारा इसे लाखों विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण योजना बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

छात्रों का कहना है कि वेबसाइट बार-बार सर्वर डाउन होने, लॉगिन न होने, डेटा सेव न होने और फॉर्म सबमिट न होने जैसी समस्याओं से घिरी रहती है। महीनों से यह स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण कई छात्र-छात्राएं तंग आकर आवेदन प्रक्रिया ही छोड़ देने को मजबूर हो रहे हैं।

यह बेहद चिंताजनक है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई इस प्रणाली में बुनियादी तकनीकी स्थिरता तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी। यदि छात्र समय पर फॉर्म ही जमा नहीं कर पाएंगे, तो छात्रवृत्ति का लाभ कैसे मिल पाएगा? यह सीधे तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी पोर्टल को लॉन्च करने से पहले उसकी पर्याप्त तकनीकी जांच, सर्वर क्षमता परीक्षण और यूजर लोड टेस्टिंग अनिवार्य होनी चाहिए। यदि वेबसाइट बार-बार ठप हो रही है, तो यह संबंधित एजेंसी या कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सरकार को चाहिए कि :-
पोर्टल की तकनीकी ऑडिट कराई जाए।
सर्वर क्षमता बढ़ाई जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए ताकि किसी छात्र का नुकसान न हो।
जिम्मेदार एजेंसी की जवाबदेही तय की जाए।
छात्रवृत्ति केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के सपनों और शिक्षा की निरंतरता का आधार है। ऐसे में तकनीकी लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

