रांची : झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री के 23 जनवरी को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी यात्रा और वहां प्रोफेसर अल्पा शाह से संभावित मुलाकात को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस प्रस्तावित मुलाकात पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री और उनके सलाहकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रोफेसर अल्पा शाह को उनके लेखन और विचारों के कारण वामपंथी विचारधारा से जुड़ा माना जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पा शाह की पुस्तक “Nightmarch: Among India’s Revolutionary Guerrillas” में नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है और उन्हें ‘क्रांतिकारी’ के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
मरांडी ने यह भी दावा किया कि इस विचारधारा से जुड़े लोग कश्मीर को भारत से अलग करने, जनमत संग्रह की वकालत करने, भारतीय सुरक्षा बलों पर आरोप लगाने तथा समाज में विभाजन फैलाने जैसे विचारों का समर्थन करते रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री का ऐसे व्यक्ति से मुलाकात करना कितना उचित है, जिन पर भारत विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। मरांडी ने इसे झारखंड की जनता और देश के शहीदों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए मुख्यमंत्री से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
हालांकि, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऑक्सफोर्ड में प्रो. अल्पा शाह से संभावित मुलाकात पर बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल

